Friday, 31 October 2008

रियासत पे सियासत …

रियासत पे सियासत …
गाँधी नेहरू लड़ पड़े थे देश के लिए
आज लडाई है प्रदेश के लिए …
अनेकता में एकता की बात करते थे
क्यों भारत माता को बाँट रहे राज करने के लिए
कही खून है कही है आह
इंसान की कीमत है अब कोड़ी के भाव
सिर्फ़ प्रदेश के लिए …।
दहशत का धुआ है छाया
सारा का सारा देश है थर्राया
रियासत पे सियासत करने का ऐसा जस्बा जागा
की आदमी ही आदमी को मरने में लग गया
किस लिए सिर्फ़ प्रदेश के लिए ….
अरे!! रियासत के भूखो
कुछ तो सोचो कुछ तो समझो
मत करो इस देश के टुकड़े
हम तुम दोनों ही है इस मिट्ठी से जन्मे
क्यो लड़ रहा तू सिर्फ़ प्रदेश के लिए ….

Thursday, 30 October 2008

उनकी दिवाली,देश का दिवाला

इस दिवाली देश की न सोचो
सफेद खादी में लक्ष्मी जी को संजोलो
पाप मिटे और पुण्य आए
कलयुग से सतजुग बन जाए

पर लक्ष्मी जी जब आवाज़ लगाये
सफेद खादी दौड़ते हुए आए
बोले !! हम पर सदा कृपा बनाये रखे
हम ही तो है भक्त सच्चे
सफेद खादी में लक्ष्मी जी के रंग है निखरे

उनकी दिवाली में चाहे देश का दिवाला निकले